अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।।
मूल पाठ
कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।।
भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.301 · पुस्तक पृ. 595, 596
भावार्थ
मूल पाठ के बादकृपासिन्धु श्रीरामचन्द्रजीने सुन्दर वाणीसे भरतजीका सम्मान करके हाथ पकड़कर उनको अपने पास बिठा लिया। भरतजीकी विनती सुनकर और उनका स्वभाव देखकर सारी सभा और श्रीरघुनाथजी स्नेहसे शिथिल हो गये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 596 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कृपासिंधु सनमानि सुबानी। बैठाए समीप गहि पानी।।
English explanation
Rama, the ocean of compassion, honored Bharata with gracious words and, taking his hand, seated him nearby.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृपासिंधु | कृपा के सागर राम | Rama, the ocean of compassion |
| सनमानि | सम्मान करके | having honored |
| सुबानी | मधुर वाणी से | with gracious words |
| बैठाए | बैठाया | seated him |
| समीप | अपने पास | near himself |
| गहि | पकड़कर | taking; holding |
| पानी | हाथ | hand |
2 भरत बिनय सुनि देखि सुभाऊ। सिथिल सनेहँ सभा रघुराऊ।।
English explanation
Hearing Bharata’s plea and seeing his noble disposition, the assembly and Rama, lord of Raghu’s line, were overcome and softened by love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत की | of Bharata, Rama’s brother |
| बिनय | विनती; विनम्र निवेदन | humble plea |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| देखि | देखकर | having seen |
| सुभाऊ | सुंदर स्वभाव | noble disposition |
| सिथिल | शिथिल; भावों से अभिभूत | softened; overcome |
| सनेहँ | प्रेम से | with love |
| सभा | सभा के लोग | the assembly |
| रघुराऊ | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.301
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 596
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 595, 596
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।