अयोध्याकाण्ड · छंद · छंद
तुम्हरें अनुग्रह तात कानन जात सब सुखु पाइहौं।
मूल पाठ
तुम्हरें अनुग्रह तात कानन जात सब सुखु पाइहौं।
प्रतिपालि आयसु कुसल देखन पाय पुनि फिरि आइहौं॥
जननीं सकल परितोषि परि परि पायँ करि बिनती घनी।
तुलसी करेहु सोइ जतनु जेहिं कुसली रहहिं कोसलधनी॥
स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे पिताजी! आपके अनुग्रहसे मैं वन जाते हुए सब प्रकारका सुख पाऊँगा। आज्ञाका भलीभाँति पालन करके चरणोंका दर्शन करने कुशलपूर्वक फिर लौट आऊँगा। सब माताओंके पैरों पड़- पड़कर उनका समाधान करके और उनसे बहुत विनती करके—तुलसीदास कहते हैं—तुम वही प्रयत्न करना जिसमें कोसलपति पिताजी कुशल रहें।
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 469 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1तुम्हरें अनुग्रह तात कानन जात सब सुखु पाइहौं।
English explanation
Dear father, through your grace I shall find every happiness as I go to the forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हरें | आपके | your |
| अनुग्रह | कृपा से | through grace |
| तात | हे तात, हे पिता | dear father |
| कानन | वन में | to the forest |
| जात | जाते हुए | while going |
| सब | सभी | all |
| सुखु | सुख | happiness |
| पाइहौं | मैं पाऊँगा | I shall obtain |
2प्रतिपालि आयसु कुसल देखन पाय पुनि फिरि आइहौं॥
English explanation
Having fulfilled your command, I shall return safely to behold your feet again.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रतिपालि | पालन करके | having fulfilled |
| आयसु | आज्ञा का | the command |
| कुसल | कुशलपूर्वक | safely |
| देखन | देखने के लिए | to behold |
| पाय | आपके चरण | your feet |
| पुनि | फिर | again |
| फिरि | लौटकर | returning |
| आइहौं | मैं आऊँगा | I shall come |
3जननीं सकल परितोषि परि परि पायँ करि बिनती घनी।
English explanation
Having reassured all his mothers, Rama repeatedly bowed at their feet and made earnest entreaties.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जननीं | माताओं को | the mothers |
| सकल | सभी | all |
| परितोषि | संतुष्ट करके | having reassured |
| परि | पड़कर | bowing down |
| परि | बार-बार पड़कर | bowing repeatedly |
| पायँ | चरणों में | at their feet |
| करि | करके | making |
| बिनती | विनती | entreaties |
| घनी | बहुत | many earnest |
4तुलसी करेहु सोइ जतनु जेहिं कुसली रहहिं कोसलधनी॥
English explanation
Tulsidas relates Rama’s plea: Make every effort that will keep Dasharatha, lord of Kosala, well.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुलसी | कवि तुलसीदास | the poet Tulsidas |
| करेहु | आप कीजिए | please make |
| सोइ | वही | that very |
| जतनु | प्रयत्न | effort |
| जेहिं | जिससे | by which |
| कुसली | कुशल और स्वस्थ | well and safe |
| रहहिं | रहें | may remain |
| कोसलधनी | कोसल के स्वामी दशरथ | Dasharatha, lord of Kosala |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- छंद
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 469
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।