अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी।।
मूल पाठ
करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी।।
बन मग मंगल कुसल हमारें। कृपा अनुग्रह पुन्य तुम्हारें।।
स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर पाँव पकड़कर विनती करना कि हे पिताजी! आप मेरी चिन्ता न कीजिये। आपकी कृपा, अनुग्रह और पुण्यसे वनमें और मार्गमें हमारा कुशल-मङ्गल होगा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 469 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 करबि पायँ परि बिनय बहोरी। तात करिअ जनि चिंता मोरी।।
English explanation
‘Then fall at his feet and plead: Father, please do not worry about me.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| करबि | करना | make |
| पायँ | पैरों पर | at his feet |
| परि | गिरकर | having fallen |
| बिनय | विनती | a humble plea |
| बहोरी | फिर | then again |
| तात | पिताजी | Father |
| करिअ | कीजिए | please do |
| जनि | न | not |
| चिंता | चिंता | worry |
| मोरी | मेरी | about me |
2 बन मग मंगल कुसल हमारें। कृपा अनुग्रह पुन्य तुम्हारें।।
English explanation
‘Through your kindness, favor, and merit, all is auspicious and well with us on the forest journey.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बन | वन के | of the forest |
| मग | मार्ग में | on the path |
| मंगल | मंगल | auspiciousness |
| कुसल | कुशल; सुख-क्षेम | well-being |
| हमारें | हमारा; हमारे लिए | ours; for us |
| कृपा | कृपा से | through kindness |
| अनुग्रह | अनुग्रह से | through favor |
| पुन्य | पुण्य से | through accumulated merit |
| तुम्हारें | आपके | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 469
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।