अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा। बोले मधुर बचन धरि धीरा।।
मूल पाठ
बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा। बोले मधुर बचन धरि धीरा।।
तात प्रनामु तात सन कहेहु। बार बार पद पंकज गहेहू।।
स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुझे व्याकुल देखकर श्रीरामचन्द्रजी धीरज धरकर मधुर वचन बोले—हे तात! पिताजीसे मेरा प्रणाम कहना और मेरी ओरसे बार-बार उनके चरणकमल पकडऩा॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 469 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 बिकल बिलोकि मोहि रघुबीरा। बोले मधुर बचन धरि धीरा।।
English explanation
Seeing me distressed, Rama, the hero of Raghu’s line, composed himself and spoke gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिकल | व्याकुल | distressed |
| बिलोकि | देखकर | having seen |
| मोहि | मुझे, सुमंत्र को | me, Sumantra |
| रघुबीरा | रघुकुल के वीर राम | Rama, hero of the Raghu lineage |
| बोले | बोले | spoke |
| मधुर | मधुर | gentle |
| बचन | वचन | words |
| धरि | धारण करके | maintaining |
| धीरा | धैर्य | composure |
2 तात प्रनामु तात सन कहेहु। बार बार पद पंकज गहेहू।।
English explanation
Rama said, ‘Dear sir, convey my respectful salutations to my father, and clasp his lotus feet repeatedly.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | तात, आदरणीय सुमंत्र | dear sir, respected Sumantra |
| प्रनामु | मेरा प्रणाम | my respectful salutations |
| तात | पिता दशरथ | my father Dasharatha |
| सन | से | to |
| कहेहु | कहना | convey |
| बार | बार | time |
| बार | बार; बार-बार | after time; repeatedly |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल; कमल जैसे | lotuses; lotus-like |
| गहेहू | पकड़ना | clasp |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 469
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
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