अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई।।
मूल पाठ
राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई।।
लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई।।
स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब श्रीरामचन्द्रजीके सखा निषादराजने नाव मँगवायी। पहले प्रिया सीताजीको उसपर चढ़ाकर फिर श्रीरघुनाथजी चढ़े। फिर लक्ष्मणजीने धनुष-बाण सजाकर रखे और प्रभु श्रीरामचन्द्रजीकी आज्ञा पाकर स्वयं चढ़े॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 469 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 राम सखाँ तब नाव मगाई। प्रिया चढ़ाइ चढ़े रघुराई।।
English explanation
Then Rama’s friend Guha had a boat brought. After helping his beloved wife Sita aboard, Rama boarded it.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम के | of Rama |
| सखाँ | मित्र गुह ने | his friend Guha |
| तब | तब | then |
| नाव | नाव | a boat |
| मगाई | मँगवाई | had brought |
| प्रिया | प्रिय पत्नी सीता को | his beloved wife Sita |
| चढ़ाइ | चढ़ाकर | having helped aboard |
| चढ़े | चढ़े | boarded |
| रघुराई | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
2 लखन बान धनु धरे बनाई। आपु चढ़े प्रभु आयसु पाई।।
English explanation
Lakshmana arranged the arrows and bow securely, then boarded the boat himself after receiving Lord Rama’s permission.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लखन | लक्ष्मण ने | Lakshmana |
| बान | बाण | arrows |
| धनु | धनुष | bow |
| धरे | रखे | placed |
| बनाई | ठीक से व्यवस्थित करके | in proper order |
| आपु | स्वयं | himself |
| चढ़े | नाव पर चढ़े | boarded the boat |
| प्रभु | प्रभु राम की | of Lord Rama |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | पाकर | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 469
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
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