अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई।।
मूल पाठ
केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई।।
होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा।।
स्रोत अभिलेख 2.151 · पुस्तक पृ. 469, 469
भावार्थ
मूल पाठ के बादकेवट (निषादराज) ने बहुत सेवा की। वह रात सिंगरौर (शृंगवेरपुर) में ही बितायी। दूसरे दिन सबेरा होते ही बड़का दूध मँगवाया और उससे श्रीराम-लक्ष्मणने अपने सिरोंपर जटाओंके मुकुट बनाये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 469 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 केवट कीन्हि बहुत सेवकाई। सो जामिनि सिंगरौर गवाँई।।
English explanation
AI draft: Guha, the Nishada chief, rendered much service. Rama spent that night at Shringaverapura.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| केवट | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| कीन्हि | की | performed |
| बहुत | बहुत | much |
| सेवकाई | सेवा | service |
| सो | वह | that |
| जामिनि | रात | night |
| सिंगरौर | शृंगवेरपुर में | at Shringaverapura |
| गवाँई | बिताई | spent |
2 होत प्रात बट छीरु मगावा। जटा मुकुट निज सीस बनावा।।
English explanation
At daybreak, Rama had banyan sap brought and fashioned a crown of matted locks on his head.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होत | होते ही | upon its becoming |
| प्रात | प्रातःकाल | morning |
| बट | बरगद का | of the banyan tree |
| छीरु | दूध जैसा रस | milky sap |
| मगावा | मँगवाया | had brought |
| जटा | जटाओं का | of matted locks |
| मुकुट | मुकुट | crown |
| निज | अपने | his own |
| सीस | सिर पर | on the head |
| बनावा | बनाया | fashioned |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.151
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 469
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 469, 469
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