अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।।
मूल पाठ
हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।।
बिमल बिबेक धरम नय साली। भरत भारती मंजु मराली।।
स्रोत अभिलेख 2.297 · पुस्तक पृ. 592, 592
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर उन्होंने हृदयमें सुहावनी सरस्वतीजीका स्मरण किया। वे मानससे (उनके मनरूपी मानसरोवरसे) उनके मुखारविन्दपर आ विराजीं। निर्मल विवेक, धर्म और नीतिसे युक्त भरतजीकी वाणी सुन्दर हंसिनी [के समान गुण-दोषका विवेचन करनेवाली] है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 592 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 हियँ सुमिरी सारदा सुहाई। मानस तें मुख पंकज आई।।
English explanation
Bharata recalled lovely Saraswati in his heart; she came from the lake of his mind to the lotus of his mouth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हियँ | हृदय में | in the heart |
| सुमिरी | स्मरण किया | recalled |
| सारदा | वाणी की देवी सरस्वती को | Saraswati, goddess of speech |
| सुहाई | सुंदर | lovely |
| मानस | मन रूपी मानस-सरोवर | the mind figured as Lake Manasa |
| तें | से | from |
| मुख | मुख रूपी | the mouth figured as |
| पंकज | कमल पर | a lotus |
| आई | आ गईं | came |
2 बिमल बिबेक धरम नय साली। भरत भारती मंजु मराली।।
English explanation
Bharata’s speech was like a graceful female swan, endowed with pure discernment, righteousness, and wise conduct.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिमल | निर्मल | pure |
| बिबेक | विवेक | discernment |
| धरम | धर्म | righteousness |
| नय | नीति | wise conduct |
| साली | से संपन्न | endowed with |
| भरत | भरत की | Bharata’s |
| भारती | वाणी | speech |
| मंजु | सुंदर | graceful |
| मराली | हंसिनी | female swan |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.297
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 592
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 592, 592
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