अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहा रघुकुलको आनन्द देनेवाले मेरे प्राणप्यारे राम! तुम्हारे बिना जीते हुए मुझे बहुत दिन बीत गये। हा जानकी, लक्ष्मण! हा रघुवर! हा पिताके चित्तरूपी चातकके हित करनेवाले मेघ!॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 472 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।।
हा जानकी लखन हा रघुबर। हा पितु हित चित चातक जलधर।
स्रोत अभिलेख 2.155 · पुस्तक पृ. 472, 473
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हा रघुनंदन प्रान पिरीते। तुम्ह बिनु जिअत बहुत दिन बीते।।
English explanation
Alas, Rama, beloved of my very life! So many days have passed with me living without you.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हा | हाय | alas |
| रघुनंदन | हे रघुवंश के आनंद राम | O Rama, delight of Raghu’s lineage |
| प्रान | प्राणों के | of my very life |
| पिरीते | प्रिय | beloved |
| तुम्ह | तुम्हारे | you |
| बिनु | बिना | without |
| जिअत | जीवित रहते हुए | while remaining alive |
| बहुत | बहुत | many |
| दिन | दिन | days |
| बीते | बीत गए | have passed |
2 हा जानकी लखन हा रघुबर। हा पितु हित चित चातक जलधर।
English explanation
Alas, Sita! Lakshmana! Alas, Rama, foremost of Raghu’s line! Alas, your father’s well-wisher, the raincloud for his heart that yearns like a chataka bird!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हा | हाय | alas |
| जानकी | हे जनक की पुत्री सीता | O Sita, Janaka’s daughter |
| लखन | हे लक्ष्मण | O Lakshmana |
| हा | हाय | alas |
| रघुबर | हे रघुवंश में श्रेष्ठ राम | O Rama, foremost of Raghu’s line |
| हा | हाय | alas |
| पितु | पिता के | of your father |
| हित | हितैषी | well-wisher |
| चित | चित्त | heart |
| चातक | चातक पक्षी के समान | like a chataka bird |
| जलधर | मेघस्वरूप | raincloud |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.155
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 472
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 472, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।