अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।।
मूल पाठ
भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।।
सो तनु राखि करब मैं काहा। जेंहि न प्रेम पनु मोर निबाहा।।
स्रोत अभिलेख 2.155 · पुस्तक पृ. 472, 473
भावार्थ
मूल पाठ के बादउस इतिहासका वर्णन करते-करते राजा व्याकुल हो गये और कहने लगे कि श्रीरामके बिना जीनेकी आशाको धिक् कार है। मैं उस शरीरको रखकर क्या करूँगा जिसने मेरा प्रेमका प्रण नहीं निबाहा?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 472 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 भयउ बिकल बरनत इतिहासा। राम रहित धिग जीवन आसा।।
English explanation
Recounting that past event, the king became distraught. “Shame on the hope of living without Rama!”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भयउ | हो गए | became |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बरनत | वर्णन करते हुए | while recounting |
| इतिहासा | पुरानी घटना का | the past event |
| राम | राम से | Rama |
| रहित | विहीन | without |
| धिग | धिक्कार है | shame upon |
| जीवन | जीने की | of living |
| आसा | आशा | the hope |
2 सो तनु राखि करब मैं काहा। जेंहि न प्रेम पनु मोर निबाहा।।
English explanation
What shall I do by preserving this body, which has failed to uphold my pledge of love?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस | that |
| तनु | शरीर को | body |
| राखि | बचाए रखकर | by preserving |
| करब | करूँगा | shall do |
| मैं | मैं | I |
| काहा | क्या | what |
| जेंहि | जिसने | which |
| न | नहीं | not |
| प्रेम | प्रेम का | of love |
| पनु | प्रण | pledge |
| मोर | मेरा | my |
| निबाहा | निभाया | upheld |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.155
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 472
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 472, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।