अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।।
मूल पाठ
बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।।
तापस अंध साप सुधि आई। कौसल्यहि सब कथा सुनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.155 · पुस्तक पृ. 472, 473
भावार्थ
मूल पाठ के बादराजा व्याकुल होकर बहुत प्रकारसे विलाप कर रहे हैं। वह रात युगके समान बड़ी हो गयी, बीतती ही नहीं। राजाको अंधे तपस्वी (श्रवणकुमारके पिता) के शापकी याद आ गयी। उन्होंने सब कथा कौसल्याको कह सुनायी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 472 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 बिलपत राउ बिकल बहु भाँती। भइ जुग सरिस सिराति न राती।।
English explanation
The distraught king lamented in many ways. The night seemed an age and would not end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिलपत | विलाप करते हुए | lamenting |
| राउ | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| बिकल | व्याकुल | distraught |
| बहु | अनेक | many |
| भाँती | प्रकारों से | in ways |
| भइ | हो गई | became |
| जुग | युग | an age |
| सरिस | के समान | like |
| सिराति | बीतती थी | was passing |
| न | नहीं | not |
| राती | रात | the night |
2 तापस अंध साप सुधि आई। कौसल्यहि सब कथा सुनाई।।
English explanation
He remembered the blind ascetic’s curse and told Kaushalya the entire story.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तापस | तपस्वी के | of the ascetic |
| अंध | अंधे | blind |
| साप | शाप की | of the curse |
| सुधि | स्मृति | recollection |
| आई | आई | came to him |
| कौसल्यहि | कौसल्या को | to Kaushalya, Rama’s mother |
| सब | सारी | the entire |
| कथा | कथा | story |
| सुनाई | सुनाई | recounted |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.155
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 472
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 472, 473
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।