अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी।।
मूल पाठ
हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी।।
आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि। हरषी रबिकुल जलरुह चंदिनि।।
स्रोत अभिलेख 2.159 · पुस्तक पृ. 475, 476
भावार्थ
मूल पाठ के बादबाजार और रास्ते देखे नहीं जाते। मानो नगरमें दसों दिशाओंमें दावाग्नि लगी है! पुत्रको आते सुनकर सूर्यकुलरूपी कमलके लिये चाँदनीरूपी कैकेयी [बड़ी] हॢषत हुई॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 475 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हाट बाट नहिं जाइ निहारी। जनु पुर दहँ दिसि लागि दवारी।।
English explanation
The markets and streets were unbearable to look at, as though fire had broken out throughout the city in all ten directions.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हाट | बाज़ार | markets |
| बाट | रास्ते | streets |
| नहिं | नहीं | not |
| जाइ | जा सकते | could be |
| निहारी | देखे | looked upon |
| जनु | मानो | as though |
| पुर | नगर में | in the city |
| दहँ | दसों | all ten |
| दिसि | दिशाओं में | in the directions |
| लागि | लग गई हो | had broken out |
| दवारी | आग | a conflagration |
2 आवत सुत सुनि कैकयनंदिनि। हरषी रबिकुल जलरुह चंदिनि।।
English explanation
Hearing that her son was arriving, Kaikeyi, daughter of the king of Kekaya, rejoiced—she was like moonlight to the lotus of the solar dynasty.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | coming |
| सुत | पुत्र भरत को | her son Bharata |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| कैकयनंदिनि | कैकेय की पुत्री कैकेयी | Kaikeyi, daughter of the king of Kekaya |
| हरषी | हर्षित हुई | rejoiced |
| रबिकुल | सूर्यवंशरूपी | the solar dynasty, likened to |
| जलरुह | कमल के लिए | a lotus |
| चंदिनि | चाँदनी | moonlight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.159
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 475
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 475, 476
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।