अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई।।
मूल पाठ
सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई।।
भरत दुखित परिवारु निहारा। मानहुँ तुहिन बनज बनु मारा।।
स्रोत अभिलेख 2.159 · पुस्तक पृ. 475, 476
भावार्थ
मूल पाठ के बादवह आरती सजाकर आनन्दमें भरकर उठ दौड़ी और दरवाजेपर ही मिलकर भरत- शत्रुघ्नको महलमें ले आयी। भरतने सारे परिवारको दुखी देखा। मानो कमलोंके वनको पाला मार गया हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 475 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सजि आरती मुदित उठि धाई। द्वारेहिं भेंटि भवन लेइ आई।।
English explanation
Preparing the ceremonial welcome lamp, she rose joyfully and hurried out; meeting Bharata at the very doorway, she brought him into the palace.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सजि | सजाकर | preparing |
| आरती | स्वागत की आरती | the ceremonial welcome lamp |
| मुदित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| उठि | उठकर | rising |
| धाई | दौड़ी | hurried out |
| द्वारेहिं | द्वार पर ही | at the very doorway |
| भेंटि | मिलकर | meeting him |
| भवन | भवन में | into the palace |
| लेइ | लेकर | taking him |
| आई | आई | came back |
2 भरत दुखित परिवारु निहारा। मानहुँ तुहिन बनज बनु मारा।।
English explanation
Bharata saw the family stricken with grief, as though frost had destroyed a grove of lotuses.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत ने | Bharata |
| दुखित | दुःखी | grief-stricken |
| परिवारु | परिवार को | the family |
| निहारा | देखा | saw |
| मानहुँ | मानो | as though |
| तुहिन | पाले ने | frost |
| बनज | कमलों का | of lotuses |
| बनु | वन | a grove |
| मारा | नष्ट कर दिया हो | had destroyed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.159
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 475
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 475, 476
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।