अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कैकेई हरषित एहि भाँति। मनहुँ मुदित दव लाइ किराती।।
मूल पाठ
कैकेई हरषित एहि भाँति। मनहुँ मुदित दव लाइ किराती।।
सुतहि ससोच देखि मनु मारें। पूँछति नैहर कुसल हमारें।।
स्रोत अभिलेख 2.159 · पुस्तक पृ. 475, 476
भावार्थ
मूल पाठ के बादएक कैकेयी ही इस तरह हॢषत दीखती है मानो भीलनी जंगलमें आग लगाकर आनन्दमें भर रही हो। पुत्रको सोचवश और मनमारे (बहुत उदास) देखकर वह पूछने लगी—हमारे नैहरमें कुशल तो है?॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 475 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कैकेई हरषित एहि भाँति। मनहुँ मुदित दव लाइ किराती।।
English explanation
Kaikeyi was happy in this manner, like a Kirata woman rejoicing after setting the forest ablaze.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कैकेई | भरत की माता कैकेयी | Kaikeyi, Bharata’s mother |
| हरषित | प्रसन्न थी | was happy |
| एहि | इस | this |
| भाँति | तरह | way |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मुदित | प्रसन्न हो | rejoicing |
| दव | वन की आग | a forest fire |
| लाइ | लगाकर | having set |
| किराती | किरात समुदाय की स्त्री | a woman of the Kirata community |
2 सुतहि ससोच देखि मनु मारें। पूँछति नैहर कुसल हमारें।।
English explanation
Seeing her son sorrowful, she suppressed her own feelings and asked about the well-being of her parental home.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुतहि | पुत्र को | her son |
| ससोच | शोकयुक्त | sorrowful |
| देखि | देखकर | seeing |
| मनु | अपना मन | her own feelings |
| मारें | दबाकर | suppressing |
| पूँछति | पूछती है | asks |
| नैहर | मायके की | of her parental home |
| कुसल | कुशल-क्षेम | well-being |
| हमारें | हमारे | our |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.159
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 475
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 475, 476
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।