अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें।।
मूल पाठ
हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें।।
तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि। छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि।।
स्रोत अभिलेख 2.13 · पुस्तक पृ. 354, 354
भावार्थ
मूल पाठ के बादरानी हँसकर कहने लगी कि तेरे बड़े गाल हैं (तू बहुत बढ़-बढ़कर बोलनेवाली है)। मेरा मन कहता है कि लक्ष्मणने तुझे कुछ सीख दी है (दण्ड दिया है)। तब भी वह महापापिनी दासी कुछ भी नहीं बोलती। ऐसी लंबी साँस छोड़ रही है, मानो काली नागिन [फुफकार छोड़ रही] हो॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 354 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हँसि कह रानि गालु बड़ तोरें। दीन्ह लखन सिख अस मन मोरें।।
English explanation
The queen laughed and said, ‘You are quite the boastful talker; I think Lakshmana has taught you a lesson.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हँसि | हँसकर | laughing |
| कह | कहा | said |
| रानि | रानी कैकेयी ने | Queen Kaikeyi |
| गालु | डींग, बढ़-चढ़कर बोलना | boastful talk |
| बड़ | बहुत बड़ी | great |
| तोरें | तेरी | your |
| दीन्ह | दी है | has given |
| लखन | राम के भाई लक्ष्मण ने | Lakshmana, Rama’s brother |
| सिख | सीख, सबक | a lesson |
| अस | ऐसा | so |
| मन | मन में | in the mind |
| मोरें | मेरे | my |
2 तबहुँ न बोल चेरि बड़ि पापिनि। छाड़इ स्वास कारि जनु साँपिनि।।
English explanation
Even then the deeply sinful maid did not speak; she exhaled like a black she-serpent.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तबहुँ | तब भी | even then |
| न | नहीं | not |
| बोल | बोली | spoke |
| चेरि | दासी मंथरा | the maid Manthara |
| बड़ि | बहुत बड़ी | greatly |
| पापिनि | पाप करने वाली | sinful woman |
| छाड़इ | छोड़ती है | lets out |
| स्वास | साँसें | breaths |
| कारि | काली | black |
| जनु | मानो | as though |
| साँपिनि | मादा साँप, नागिन | a she-serpent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.13
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 354
- सहायक विषय
- सरस्वतीका मन्थराकी बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 354, 354
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।