अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ। जहँ न राम पद पंकज भाऊ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजहाँ श्रीरामके चरणकमलोंमें प्रेम नहीं है, वह सुख, कर्म और धर्म जल जाय। जिसमें श्रीरामप्रेमकी प्रधानता नहीं है, वह योग कुयोग है और वह ज्ञान अज्ञान है॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 587 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ। जहँ न राम पद पंकज भाऊ।।
जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू। जहँ नहिं राम पेम परधानू।।
स्रोत अभिलेख 2.291 · पुस्तक पृ. 587, 587
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो सुखु करमु धरमु जरि जाऊ। जहँ न राम पद पंकज भाऊ।।
English explanation
AI-draft meaning: Let that happiness, action, and religious duty burn away in which there is no love for Rama’s lotus feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | वह | that |
| सुखु | सुख | happiness |
| करमु | कर्म | action |
| धरमु | धर्म | religious duty |
| जरि | जलकर | burning |
| जाऊ | नष्ट हो जाए | may perish |
| जहँ | जिसमें | in which |
| न | नहीं | no |
| राम | श्रीराम के | Rama’s |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| भाऊ | प्रेम | love |
2 जोगु कुजोगु ग्यानु अग्यानू। जहँ नहिं राम पेम परधानू।।
English explanation
Where love for Rama is not foremost, even spiritual discipline becomes misguided practice, and knowledge becomes ignorance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोगु | योग-साधना | spiritual discipline |
| कुजोगु | कुयोग; विपरीत साधना | misguided practice |
| ग्यानु | ज्ञान | knowledge |
| अग्यानू | अज्ञान | ignorance |
| जहँ | जहाँ | where |
| नहिं | नहीं | not |
| राम | श्रीराम के प्रति | for Rama |
| पेम | प्रेम | love |
| परधानू | प्रधान | foremost |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.291
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 587
- सहायक विषय
- जनक-वसिष्ठादि-संवाद, इन्द्रकी चिन्ता, सरस्वतीका इन्द्रको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 587, 587
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।