अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दइसे विचारकर भारी संकट सहकर भी प्रजा और परिवारको सुखी करो। हे भाई! मेरी विपत्ति सभीने बाँट ली है, परन्तु तुमको तो अवधि (चौदह वर्ष)-तक बड़ी कठिनाई है (सबसे अधिक दु:ख है)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 600 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी।।
बाँटी बिपति सबहिं मोहि भाई। तुम्हहि अवधि भरि बड़ि कठिनाई।।
स्रोत अभिलेख 2.306 · पुस्तक पृ. 600, 600
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सो बिचारि सहि संकटु भारी। करहु प्रजा परिवारु सुखारी।।
English explanation
Reflecting on this and enduring the grave hardship, make the people and the family happy.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | उस बात को | that consideration |
| बिचारि | विचारकर | having considered |
| सहि | सहकर | enduring |
| संकटु | संकट | hardship |
| भारी | बड़ा और गंभीर | grave |
| करहु | बनाओ | make |
| प्रजा | राज्य की जनता | the subjects |
| परिवारु | परिवार को | the family |
| सुखारी | सुखी | happy |
2 बाँटी बिपति सबहिं मोहि भाई। तुम्हहि अवधि भरि बड़ि कठिनाई।।
English explanation
I welcomed the sharing of adversity among everyone; yet you will face great difficulty throughout the appointed period.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बाँटी | बँटी हुई | shared out |
| बिपति | विपत्ति | adversity |
| सबहिं | सबमें | among everyone |
| मोहि | मुझे | to me |
| भाई | अच्छी लगी | was agreeable |
| तुम्हहि | तुम्हें | to you |
| अवधि | निर्धारित समयावधि | the appointed period |
| भरि | पूरे समय तक | throughout |
| बड़ि | बड़ी | great |
| कठिनाई | कठिनाई | difficulty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.306
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 600
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 600, 600
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।