अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जानि तुम्हहि मृदु कहउँ कठोरा। कुसमयँ तात न अनुचित मोरा।।
मूल पाठ
जानि तुम्हहि मृदु कहउँ कठोरा। कुसमयँ तात न अनुचित मोरा।।
होहिं कुठायँ सुबंधु सुहाए। ओड़िअहिं हाथ असनिहु के घाए।।
स्रोत अभिलेख 2.306 · पुस्तक पृ. 600, 600
भावार्थ
मूल पाठ के बादतुमको कोमल जानकर भी मैं कठोर (वियोगकी बात) कह रहा हूँ। हे तात! बुरे समयमें मेरे लिये यह कोई अनुचित बात नहीं है। कुठौर (कुअवसर) में श्रेष्ठ भाई ही सहायक होते हैं। वज्रके आघात भी हाथसे ही रोके जाते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 600 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जानि तुम्हहि मृदु कहउँ कठोरा। कुसमयँ तात न अनुचित मोरा।।
English explanation
Though I know your gentle nature, I speak harsh words; dear brother, in this time of adversity, it is not improper for me to do so.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जानि | जानकर | knowing |
| तुम्हहि | तुम्हें | you |
| मृदु | कोमल स्वभाव वाला | gentle-natured |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I say |
| कठोरा | कठोर बात | harsh words |
| कुसमयँ | विपत्ति के समय में | in a time of adversity |
| तात | प्रिय भाई | dear brother |
| न | नहीं | not |
| अनुचित | अनुचित | improper |
| मोरा | मेरा ऐसा कहना | my speaking thus |
2 होहिं कुठायँ सुबंधु सुहाए। ओड़िअहिं हाथ असनिहु के घाए।।
English explanation
Good kinsmen prove their worth in adversity; even thunderbolt blows are met by putting one’s hands forward.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| होहिं | होते हैं | are |
| कुठायँ | बुरे अवसर या संकट में | in adversity |
| सुबंधु | अच्छे बंधु | good kinsmen |
| सुहाए | शोभनीय, उपयोगी सिद्ध | worthy and valuable |
| ओड़िअहिं | सामने किए जाते हैं | are thrust forward to intercept |
| हाथ | हाथ | hands |
| असनिहु | वज्र के भी | even of a thunderbolt |
| के | के | of |
| घाए | प्रहार | blows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.306
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 600
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 600, 600
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।