अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सो गोसाइँ नहि दूसर कोपी। भुजा उठाइ कहउँ पन रोपी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं भुजा उठाकर और प्रण रोपकर (बड़े जोरके साथ) कहता हूँ, ऐसा स्वामी आपके सिवा दूसरा कोई नहीं है। [बंदर आदि] पशु नाचते और तोते [सीखे हुए] पाठमें प्रवीण हो जाते हैं। परन्तु तोतेका [पाठप्रवीणतारूप] गुण और पशुके नाचनेकी गति [क्रमश:] पढ़ानेवाले और नचानेवालेके अधीन है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 594 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सो गोसाइँ नहि दूसर कोपी। भुजा उठाइ कहउँ पन रोपी।।
पसु नाचत सुक पाठ प्रबीना। गुन गति नट पाठक आधीना।।
स्रोत अभिलेख 2.299 · पुस्तक पृ. 593, 594
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सो गोसाइँ नहि दूसर कोपी। भुजा उठाइ कहउँ पन रोपी।।
English explanation
There is no other such master; raising my arm, I declare this with a firm pledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सो | ऐसा | such |
| गोसाइँ | स्वामी | master |
| नहि | नहीं | not |
| दूसर | दूसरा | another |
| कोपी | कोई भी | anyone else |
| भुजा | बाँह | arm |
| उठाइ | उठाकर | raising |
| कहउँ | मैं कहता हूँ | I declare |
| पन | प्रतिज्ञा | pledge |
| रोपी | दृढ़ करके | firmly establishing |
2 पसु नाचत सुक पाठ प्रबीना। गुन गति नट पाठक आधीना।।
English explanation
Animals dance and parrots become skilled at recitation; their abilities and performance depend on the trainer and the teacher.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पसु | पशु | animals |
| नाचत | नाचते हैं | dance |
| सुक | तोते | parrots |
| पाठ | पाठ करने में | in recitation |
| प्रबीना | कुशल | proficient |
| गुन | गुण, सीखी हुई क्षमताएँ | acquired abilities |
| गति | कौशल और प्रदर्शन | skill and performance |
| नट | पशु को नचाने वाले के | the animal trainer’s |
| पाठक | पाठ सिखाने वाले के | the recitation teacher’s |
| आधीना | अधीन | dependent upon |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.299
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 594
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 593, 594
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।