अयोध्याकाण्ड · दोहा 299 · दोहा/सोरठा
यों सुधारि सनमानि जन किए साधु सिरमोर।
मूल पाठ
यों सुधारि सनमानि जन किए साधु सिरमोर।
को कृपाल बिनु पालिहै बिरिदावलि बरजोर।।299।।
स्रोत अभिलेख 2.299 · पुस्तक पृ. 593, 594
भावार्थ
मूल पाठ के बादइस प्रकार अपने सेवकोंकी (बिगड़ी) बात सुधारकर और सम्मान देकर आपने उन्हें साधुओंका शिरोमणि बना दिया। कृपालु (आप) के सिवा अपनी विरदावलीका और कौन जबर्दस्ती (हठपूर्वक) पालन करेगा?॥ २९९॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 594 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1यों सुधारि सनमानि जन किए साधु सिरमोर।
English explanation
In this way, you improved and honored your servants, making them foremost among the virtuous.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| यों | इस प्रकार | in this way |
| सुधारि | सुधारकर | having improved |
| सनमानि | सम्मान देकर | having honored |
| जन | सेवकों को | your servants |
| किए | बना दिया | made |
| साधु | साधुओं में | among the virtuous |
| सिरमोर | सर्वश्रेष्ठ | foremost |
2 को कृपाल बिनु पालिहै बिरिदावलि बरजोर।।299।।
English explanation
Who but a compassionate one like you would so steadfastly live up to his celebrated reputation?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| को | कौन | who |
| कृपाल | कृपालु के | a compassionate one |
| बिनु | बिना | except for |
| पालिहै | निभाएगा | will uphold |
| बिरिदावलि | यशोगाथा, प्रशंसित प्रतिष्ठा | celebrated reputation |
| बरजोर | दृढ़ता और सामर्थ्य से | steadfastly and powerfully |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 299
- स्रोत अभिलेख
- 2.299
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 594
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 593, 594
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