अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।।
मूल पाठ
सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।।
भरत बिबेक बराहँ बिसाला। अनायास उधरी तेहि काला।।
स्रोत अभिलेख 2.297 · पुस्तक पृ. 592, 592
भावार्थ
मूल पाठ के बादशोकरूपी हिरण्याक्षने [सारी सभाकी] बुद्धिरूपी पृथ्वीको हर लिया जो विमल गुणसमूहरूपी जगत्की योनि (उत्पन्न करनेवाली) थी। भरतजीके विवेकरूपी विशाल वराह (वराहरूपधारी भगवान्) ने [शोकरूपी हिरण्याक्षको नष्ट कर] बिना ही परिश्रम उसका उद्धार कर दिया!॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 592 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सोक कनकलोचन मति छोनी। हरी बिमल गुन गन जगजोनी।।
English explanation
Sorrow, figured as Hiranyaksha, had carried off the earth-like intellect, the mother of hosts of pure virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सोक | शोक रूपी | sorrow figured as |
| कनकलोचन | हिरण्याक्ष दैत्य | the demon Hiranyaksha |
| मति | बुद्धि रूपी | intellect figured as |
| छोनी | पृथ्वी को | the earth |
| हरी | हर लिया | carried off |
| बिमल | निर्मल | pure |
| गुन | गुणों के | of virtues |
| गन | समूह | hosts |
| जगजोनी | उत्पत्ति की जननी | the mother or source |
2 भरत बिबेक बराहँ बिसाला। अनायास उधरी तेहि काला।।
English explanation
At that moment, the earth-like intellect was effortlessly rescued by the mighty Varaha of Bharata’s discernment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| बिबेक | विवेक रूपी | discernment figured as |
| बराहँ | वराह द्वारा | by Varaha, the divine boar |
| बिसाला | विशाल | mighty |
| अनायास | बिना कठिन प्रयास के | effortlessly |
| उधरी | वह उबार ली गई | she was rescued |
| तेहि | उस | that |
| काला | समय में | at the time |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.297
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 592
- सहायक विषय
- श्रीराम-भरत-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 592, 592
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