अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।।
मूल पाठ
सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।।
भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू।।
स्रोत अभिलेख 2.235 · पुस्तक पृ. 539, 540
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरतजीने सेवक (गुह) के सब वचन सत्य जाने और वे आश्रमके समीप जा पहुँचे। वहाँके वन और पर्वतोंके समूहको देखा तो भरतजी इतने आनन्दित हुए मानो कोई भूखा अच्छा अन्न (भोजन) पा गया हो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 539 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सेवक बचन सत्य सब जाने। आश्रम निकट जाइ निअराने।।
English explanation
Finding all the servant’s words true, they went toward the hermitage and drew close.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सेवक | सेवक की | the servant’s |
| बचन | बातें | words |
| सत्य | सच्ची | true |
| सब | सभी | all |
| जाने | जान लीं | recognized as |
| आश्रम | आश्रम के | the hermitage |
| निकट | पास | near |
| जाइ | जाकर | having gone |
| निअराने | निकट पहुँच गए | drew close |
2 भरत दीख बन सैल समाजू। मुदित छुधित जनु पाइ सुनाजू।।
English explanation
Bharata saw the forest and the gathered hills and rejoiced like a hungry person finding good grain.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | राम के भाई भरत ने | Bharata, Rama’s brother |
| दीख | देखा | saw |
| बन | वन | forest |
| सैल | पर्वतों का | of hills |
| समाजू | समूह | assemblage |
| मुदित | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| छुधित | भूखा व्यक्ति | a hungry person |
| जनु | मानो | as though |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| सुनाजू | अच्छा अन्न | good grain |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.235
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 539
- सहायक विषय
- भरतजीका मन्दाकिनी-स्नान, चित्रकूटमें पहुँचना, भरतादि सबका परस्पर मिलाप, पिताका शोक और श्राद्ध
- मुद्रित पृष्ठ
- 539, 540
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।