अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।।
मूल पाठ
सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।।
गंज मंजुतर मधुकर श्रेनी। त्रिबिध बयारि बहइ सुख देनी।।
स्रोत अभिलेख 2.137 · पुस्तक पृ. 457, 458
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे कल्पवृक्षके समान स्वाभाविक ही सुन्दर हैं। मानो वे देवताओंके वन (नन्दनवन) को छोड़कर आये हों। भौंरोंकी पंक्तियाँ बहुत ही सुन्दर गुंजार करती हैं और सुख देनेवाली शीतल, मन्द, सुगन्धित हवा चलती रहती है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 458 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुरतरु सरिस सुभायँ सुहाए। मनहुँ बिबुध बन परिहरि आए।।
English explanation
They are naturally lovely like celestial trees, as though they had left the gods’ forest and come here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुरतरु | देववृक्षों के | celestial trees |
| सरिस | समान | like |
| सुभायँ | स्वभावतः | by nature |
| सुहाए | सुंदर लगते हैं | look lovely |
| मनहुँ | मानो | as though |
| बिबुध | देवताओं का | of the gods |
| बन | वन | forest |
| परिहरि | छोड़कर | having left |
| आए | आए हों | had come |
2 गंज मंजुतर मधुकर श्रेनी। त्रिबिध बयारि बहइ सुख देनी।।
English explanation
Swarms of bees hum very sweetly; a breeze with three qualities—cool, gentle, and fragrant—blows, bringing comfort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गंज | गुंजार करती हैं | hum |
| मंजुतर | अत्यंत मधुर | very sweetly |
| मधुकर | भौंरों की | of bees |
| श्रेनी | पंक्तियाँ; झुंड | rows; swarms |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली | having three qualities |
| बयारि | हवा | breeze |
| बहइ | बहती है | blows |
| सुख | सुख | comfort |
| देनी | देने वाली | giving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 458
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 457, 458
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।