अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।।
मूल पाठ
जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।।
फूलहिं फलहिं बिटप बिधि नाना।।मंजु बलित बर बेलि बिताना।।
स्रोत अभिलेख 2.137 · पुस्तक पृ. 457, 458
भावार्थ
मूल पाठ के बादजबसे श्रीरघुनाथजी वनमें आकर रहे तबसे वन मङ्गलदायक हो गया। अनेकों प्रकारके वृक्ष फूलते और फलते हैं और उनपर लिपटी हुई सुन्दर बेलोंके मण्डप तने हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 458 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 जब ते आइ रहे रघुनायकु। तब तें भयउ बनु मंगलदायकु।।
English explanation
Ever since Rama, leader of Raghu’s lineage, came to dwell there, the forest became a source of auspiciousness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| ते | से | since |
| आइ | आकर | having come |
| रहे | रहने लगे | began dwelling |
| रघुनायकु | रघुकुल के नायक राम | Rama, leader of Raghu’s lineage |
| तब | तब | then |
| तें | से | from |
| भयउ | हो गया | became |
| बनु | वन | the forest |
| मंगलदायकु | मंगल देने वाला | a source of auspiciousness |
2 फूलहिं फलहिं बिटप बिधि नाना।।मंजु बलित बर बेलि बिताना।।
English explanation
The trees blossom and bear fruit in many ways; beautiful canopies of fine creepers spread out. The reading ‘बलित’ is uncertain here.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| फूलहिं | फूलते हैं | blossom |
| फलहिं | फलते हैं | bear fruit |
| बिटप | वृक्ष | trees |
| बिधि | प्रकार से | in ways |
| नाना | अनेक | many |
| मंजु | सुंदर | beautiful |
| बलित | संभवतः ललित, सुंदर या मनोहर। | Probably lovely, graceful, or charming. |
| बर | उत्तम | fine |
| बेलि | लताओं के | of creepers |
| बिताना | वितान; फैले हुए मंडप | canopies; spreading bowers |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.137
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 458
- सहायक विषय
- चित्रकूटमें निवास, कोल-भीलोंके द्वारा सेवा
- मुद्रित पृष्ठ
- 457, 458
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।