अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।।
मूल पाठ
सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।।
आसुतोष तुम्ह अवढर दानी। आरति हरहु दीन जनु जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.44 · पुस्तक पृ. 380, 380
भावार्थ
मूल पाठ के बादफिर महादेवजीका स्मरण करके उनसे निहोरा करते हुए कहते हैं—हे सदाशिव! आप मेरी विनती सुनिये। आप आशुतोष (शीघ्र प्रसन्न होनेवाले) और अवढरदानी (मुँहमाँगा दे डालनेवाले) हैं। अत: मुझे अपना दीन सेवक जानकर मेरे दु:खको दूर कीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 380 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुमिरि महेसहि कहइ निहोरी। बिनती सुनहु सदासिव मोरी।।
English explanation
Remembering Shiva, the king pleads humbly: O ever-auspicious Shiva, hear my prayer.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमिरि | स्मरण करके | remembering |
| महेसहि | महेश अर्थात शिव को | Shiva, the great Lord |
| कहइ | कहते हैं | says |
| निहोरी | विनयपूर्वक; निहोरा करके | with humble entreaty |
| बिनती | प्रार्थना | prayer |
| सुनहु | सुनिए | please hear |
| सदासिव | हे सदा कल्याणकारी शिव | O ever-auspicious Shiva |
| मोरी | मेरी | my |
2 आसुतोष तुम्ह अवढर दानी। आरति हरहु दीन जनु जानी।।
English explanation
You are easily pleased and unstintingly generous. Knowing me to be a helpless supplicant, remove my distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आसुतोष | शीघ्र प्रसन्न होने वाले शिव | Shiva, who is quickly pleased |
| तुम्ह | आप | you |
| अवढर | अत्यंत उदार; बिना संकोच देने वाले | unstintingly generous |
| दानी | दान देने वाले | a giver |
| आरति | कष्ट; व्यथा | distress |
| हरहु | दूर कीजिए | remove |
| दीन | दीन; असहाय | helpless |
| जनु | व्यक्ति; मुझ प्रार्थी को | person; me, the supplicant |
| जानी | जानकर | recognizing as |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 380
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 380, 380
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