अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुमन बरषि सुर घन करि छाहीं। बिटप फूलि फलि तृन मृदुताहीं।।
मूल पाठ
सुमन बरषि सुर घन करि छाहीं। बिटप फूलि फलि तृन मृदुताहीं।।
मृग बिलोकि खग बोलि सुबानी। सेवहिं सकल राम प्रिय जानी।।
स्रोत अभिलेख 2.311 · पुस्तक पृ. 604, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादरास्तेमें देवता फूल बरसाकर, बादल छाया करके, वृक्ष फूल-फलकर, तृण अपनी कोमलतासे, मृग (पशु) देखकर और पक्षी सुन्दर वाणी बोलकर—सभी भरतजीको श्रीरामचन्द्रजीके प्यारे जानकर उनकी सेवा करने लगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 604 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुमन बरषि सुर घन करि छाहीं। बिटप फूलि फलि तृन मृदुताहीं।।
English explanation
The gods showered flowers and provided shade with clouds; trees blossomed and bore fruit, and the grass became soft.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुमन | फूल | flowers |
| बरषि | बरसाकर | showering |
| सुर | देवता | the gods |
| घन | बादलों से | with clouds |
| करि | करके | making |
| छाहीं | छाया | shade |
| बिटप | पेड़ | trees |
| फूलि | फूलों से खिलकर | blossoming |
| फलि | फल देकर | bearing fruit |
| तृन | घास | grass |
| मृदुताहीं | कोमल हो गई | became soft |
2 मृग बिलोकि खग बोलि सुबानी। सेवहिं सकल राम प्रिय जानी।।
English explanation
Animals serve by gazing at him and birds by singing sweetly; all serve Bharata, knowing him to be dear to Rama.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मृग | हिरण और वन-पशु | deer and forest animals |
| बिलोकि | देखकर | by gazing |
| खग | पक्षी | birds |
| बोलि | बोलकर | by calling |
| सुबानी | मधुर वाणी में | in sweet tones |
| सेवहिं | सेवा करते हैं | serve |
| सकल | सब | all |
| राम | राम के | to Rama |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| जानी | जानकर | knowing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 604
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 604, 604
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।