अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुस कंटक काँकरीं कुराईं। कटुक कठोर कुबस्तु दुराईं।।
मूल पाठ
कुस कंटक काँकरीं कुराईं। कटुक कठोर कुबस्तु दुराईं।।
महि मंजुल मृदु मारग कीन्हे। बहत समीर त्रिबिध सुख लीन्हे।।
स्रोत अभिलेख 2.311 · पुस्तक पृ. 604, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुश, काँटे, कंकड़ी, दरारें आदि कड़वी, कठोर और बुरी वस्तुओंको छिपाकर पृथ्वीने सुन्दर और कोमल मार्ग कर दिये। सुखोंको साथ लिये (सुखदायक) शीतल, मन्द, सुगन्ध हवा चलने लगी॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 604 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कुस कंटक काँकरीं कुराईं। कटुक कठोर कुबस्तु दुराईं।।
English explanation
The earth concealed sharp grass, thorns, pebbles, cracks, and other painful, hard, harmful things.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुस | नुकीली कुश घास | sharp kusha grass |
| कंटक | काँटे | thorns |
| काँकरीं | कंकड़ियाँ | pebbles |
| कुराईं | धरती की दरारें | cracks in the ground |
| कटुक | चुभने वाली | painfully sharp |
| कठोर | कठिन और सख्त | hard |
| कुबस्तु | हानिकारक वस्तुएँ | harmful objects |
| दुराईं | छिपा दीं | concealed |
2 महि मंजुल मृदु मारग कीन्हे। बहत समीर त्रिबिध सुख लीन्हे।।
English explanation
The earth made the paths beautiful and soft; the breeze blew, carrying threefold comfort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| महि | धरती ने | the earth |
| मंजुल | सुंदर | beautiful |
| मृदु | मुलायम | soft |
| मारग | रास्ते | paths |
| कीन्हे | बना दिए | made |
| बहत | बहती हुई | blowing |
| समीर | हवा | the breeze |
| त्रिबिध | तीन प्रकार का | threefold |
| सुख | सुख | comfort |
| लीन्हे | लिए हुए | carrying |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 604
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 604, 604
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