अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसमाजसहित सब सादे साजसे श्रीरामजीके वनमें भ्रमण (प्रदक्षिणा) करनेके लिये पैदल ही चले। कोमल चरण हैं और बिना जूतेके चल रहे हैं, यह देखकर पृथ्वी मन-ही-मन सकुचाकर कोमल हो गयी॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 604 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें।।
कोमल चरन चलत बिनु पनहीं। भइ मृदु भूमि सकुचि मन मनहीं।।
स्रोत अभिलेख 2.311 · पुस्तक पृ. 604, 604
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सहित समाज साज सब सादें। चले राम बन अटन पयादें।।
English explanation
With all arrangements made, they set out on foot with their company to explore Rama’s forest.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | together with |
| समाज | साथ आए लोगों का दल | their accompanying company |
| साज | प्रबंध और तैयारी | arrangements and preparations |
| सब | सभी | all |
| सादें | तैयार करके | having made ready |
| चले | चल पड़े | set out |
| राम | राम के | Rama’s |
| बन | वन में | in the forest |
| अटन | भ्रमण करने | to explore |
| पयादें | पैदल | on foot |
2 कोमल चरन चलत बिनु पनहीं। भइ मृदु भूमि सकुचि मन मनहीं।।
English explanation
As their tender feet walked without footwear, the earth felt inwardly abashed and became soft.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोमल | कोमल | tender |
| चरन | चरण | feet |
| चलत | चलते हुए | walking |
| बिनु | बिना | without |
| पनहीं | जूते या पादुका | shoes or sandals |
| भइ | हो गई | became |
| मृदु | मुलायम | soft |
| भूमि | धरती | the earth |
| सकुचि | संकोच करके | feeling abashed |
| मन | मन में | inwardly |
| मनहीं | मन के भीतर ही | within herself |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 604
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 604, 604
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।