अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती।।
मूल पाठ
कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती।।
नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई।।
स्रोत अभिलेख 2.311 · पुस्तक पृ. 604, 604
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रेमपूर्वक धर्मके इतिहास कहते वह रात सुखसे बीत गयी और सबेरा हो गया। भरत-शत्रुघ्र दोनों भाई नित्यक्रिया पूरी करके, श्रीरामजी, अत्रिजी और गुरु वसिष्ठजीकी आज्ञा पाकर,॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 604 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहत धरम इतिहास सप्रीती। भयउ भोरु निसि सो सुख बीती।।
English explanation
As they lovingly recounted stories of dharma, dawn arrived; that night passed happily.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while recounting |
| धरम | धर्म के | of dharma |
| इतिहास | पुराने वृत्तांत और कथाएँ | traditional accounts and stories |
| सप्रीती | प्रेमपूर्वक | with affection |
| भयउ | हो गया | came to be |
| भोरु | भोर | dawn |
| निसि | रात | night |
| सो | वह | that |
| सुख | सुखपूर्वक | happily |
| बीती | बीत गई | passed |
2 नित्य निबाहि भरत दोउ भाई। राम अत्रि गुर आयसु पाई।।
English explanation
Bharata and his brother completed their daily observances and obtained permission from Rama, Atri, and their preceptor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित्य | नित्यकर्म | daily observances |
| निबाहि | पूरा करके | having completed |
| भरत | राम के भाई भरत | Bharata, Rama’s brother |
| दोउ | दोनों | both |
| भाई | भाई | brothers |
| राम | श्रीराम की | of Rama |
| अत्रि | ऋषि अत्रि की | of the sage Atri |
| गुर | गुरु वसिष्ठ की | of their preceptor Vasishtha |
| आयसु | आज्ञा | permission |
| पाई | प्राप्त करके | having received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.311
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 604
- सहायक विषय
- भरतजीका तीर्थ-जल-स्थापन तथा चित्रकूटभ्रमण
- मुद्रित पृष्ठ
- 604, 604
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।