अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दफिर समाजसहित सुखपूर्वक बसे और श्रीरामजी भरतजीको युवराज बनावें। हे देव! इस सुखरूपी अमृतसे सींचकर सब किसीको जगत्में जीनेका लाभ दीजिये॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 571 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।।
एहि सुख सुधाँ सींची सब काहू। देव देहु जग जीवन लाहू।।
स्रोत अभिलेख 2.273 · पुस्तक पृ. 571, 571
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुबस बसउ फिरि सहित समाजा। भरतहि रामु करहुँ जुबराजा।।
English explanation
May Ayodhya thrive happily again with its whole community, and may Rama appoint Bharata crown prince.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुबस | सुखपूर्वक; सुचारु रूप से | happily; prosperously |
| बसउ | बसे | may it flourish |
| फिरि | फिर | again |
| सहित | साथ | together with |
| समाजा | समस्त समाज | the community |
| भरतहि | भरत को | Bharata |
| रामु | राम | Rama |
| करहुँ | बनाएँ | may appoint |
| जुबराजा | युवराज | crown prince |
2 एहि सुख सुधाँ सींची सब काहू। देव देहु जग जीवन लाहू।।
English explanation
O deity, bathe everyone in the nectar of this happiness and grant them the fulfillment of life in this world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| सुख | सुख के | of happiness |
| सुधाँ | अमृत से | with nectar |
| सींची | सींचकर | having suffused |
| सब | सब | every |
| काहू | किसी को; व्यक्ति को | person |
| देव | हे देव | O deity |
| देहु | दीजिए | grant |
| जग | संसार में | in the world |
| जीवन | जीवन का | of life |
| लाहू | लाभ; सार्थक फल | benefit; fulfillment |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.273
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 571
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 571, 571
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।