अयोध्याकाण्ड · दोहा 273 · दोहा/सोरठा
गुर समाज भाइन्ह सहित राम राजु पुर होउ।
गुर समाज भाइन्ह सहित राम राजु पुर होउ।
अछत राम राजा अवध मरिअ माग सबु कोउ।।273।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.273 · पुस्तक पृ. 571, 571
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1गुर समाज भाइन्ह सहित राम राजु पुर होउ।
गुरु, समाज और भाइयों सहित नगर में राम का राज्य हो।
English explanation
May Rama reign in the city, together with his guru, community, and brothers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गुर | गुरु | the guru |
| समाज | समाज; समुदाय | the community |
| भाइन्ह | भाइयों | brothers |
| सहित | सहित | together with |
| राम | राम का | Rama’s |
| राजु | राज्य | reign |
| पुर | नगर में | in the city |
| होउ | हो | may there be |
2 अछत राम राजा अवध मरिअ माग सबु कोउ।।273।।
राम के अयोध्या में राजा रहते हुए ही हमारी मृत्यु हो—यह सभी माँगते हैं।
English explanation
Everyone asks: may we die while Rama still reigns as king in Ayodhya.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अछत | रहते हुए; विद्यमान रहते | while still present |
| राम | राम | Rama |
| राजा | राजा | king |
| अवध | अयोध्या में | in Ayodhya |
| मरिअ | हम मरें; हमारी मृत्यु हो | may we die |
| माग | माँगता है | asks |
| सबु | सब | every |
| कोउ | कोई; व्यक्ति | person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 273
- स्रोत अभिलेख
- 2.273
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 571, 571
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।