अयोध्याकाण्ड · दोहा 274 · दोहा/सोरठा
प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु।
प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु।
सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु।।274।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 2.274 · पुस्तक पृ. 572, 572
भावार्थ और शब्दार्थ
1प्रेम मगन तेहि समय सब सुनि आवत मिथिलेसु।
उस समय सभी प्रेम में मग्न थे। मिथिला के राजा जनक के आने का समाचार सुनकर—
English explanation
At that time everyone was immersed in love. Hearing that Janaka, king of Mithila, was approaching—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| प्रेम | प्रेम में | in love |
| मगन | मग्न | immersed |
| तेहि | उस | that |
| समय | समय | time |
| सब | सभी | everyone |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| आवत | आ रहे हैं | was approaching |
| मिथिलेसु | मिथिला के राजा जनक | Janaka, king of Mithila |
2 सहित सभा संभ्रम उठेउ रबिकुल कमल दिनेसु।।274।।
सूर्यवंशरूपी कमल के सूर्य राम पूरी सभा सहित आदरपूर्ण तत्परता से उठ खड़े हुए।
English explanation
Rama, the sun to the lotus of the solar dynasty, rose with the entire assembly in eager respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सहित | साथ | together with |
| सभा | सभा के | the assembly |
| संभ्रम | आदरपूर्ण तत्परता से | with eager respect |
| उठेउ | उठ खड़े हुए | rose |
| रबिकुल | सूर्यवंश | the solar dynasty |
| कमल | कमल | lotus |
| दिनेसु | सूर्यरूपी राम | Rama as the sun |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 274
- स्रोत अभिलेख
- 2.274
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 572
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।