अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।।
मूल पाठ
सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।।
तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा।।
स्रोत अभिलेख 2.41 · पुस्तक पृ. 377, 378
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे माता! सुनो, वही पुत्र बड़भागी है, जो पिता-माताके वचनोंका अनुरागी (पालन करनेवाला) है। [आज्ञा-पालनके द्वारा] माता-पिताको सन्तुष्ट करनेवाला पुत्र, हे जननी! सारे संसारमें दुर्लभ है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 378 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सुनु जननी सोइ सुतु बड़भागी। जो पितु मातु बचन अनुरागी।।
English explanation
Listen, Mother: truly fortunate is the son who cherishes his father’s and mother’s words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनु | सुनिए | listen |
| जननी | हे माता | Mother |
| सोइ | वही | that very |
| सुतु | पुत्र | son |
| बड़भागी | अत्यंत भाग्यवान | very fortunate |
| जो | जो | who |
| पितु | पिता के | his father’s |
| मातु | माता के | his mother’s |
| बचन | वचनों का | words |
| अनुरागी | प्रेमी; प्रेमपूर्वक मानने वाला | one who lovingly honors |
2 तनय मातु पितु तोषनिहारा। दुर्लभ जननि सकल संसारा।।
English explanation
Mother, a son who brings satisfaction to his parents is rare throughout the world.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तनय | पुत्र | a son |
| मातु | माता को | his mother |
| पितु | पिता को | his father |
| तोषनिहारा | संतुष्ट करने वाला | one who satisfies |
| दुर्लभ | दुर्लभ | rare |
| जननि | हे माता | Mother |
| सकल | समस्त | the whole |
| संसारा | संसार में | in the world |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 378
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 378
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