अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
मन मुसकाइ भानुकुल भानु। रामु सहज आनंद निधानू।।
मूल पाठ
मन मुसकाइ भानुकुल भानु। रामु सहज आनंद निधानू।।
बोले बचन बिगत सब दूषन। मृदु मंजुल जनु बाग बिभूषन।।
स्रोत अभिलेख 2.41 · पुस्तक पृ. 377, 378
भावार्थ
मूल पाठ के बादसूर्यकुलके सूर्य, स्वाभाविक ही आनन्दनिधान श्रीरामचन्द्रजी मनमें मुसकराकर सब दूषणोंसे रहित ऐसे कोमल और सुन्दर वचन बोले जो मानो वाणीके भूषण ही थे—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 378 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 मन मुसकाइ भानुकुल भानु। रामु सहज आनंद निधानू।।
English explanation
Rama, the sun of the solar lineage and by nature a treasury of joy, smiled inwardly.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मन | मन ही मन | inwardly |
| मुसकाइ | मुस्कराकर | smiling |
| भानुकुल | सूर्यवंश के | of the solar lineage |
| भानु | सूर्य | the sun |
| रामु | राम | Rama |
| सहज | स्वभावतः | by nature |
| आनंद | आनंद के | of joy |
| निधानू | भंडार | treasury |
2 बोले बचन बिगत सब दूषन। मृदु मंजुल जनु बाग बिभूषन।।
English explanation
Rama spoke words free of every fault, gentle and beautiful, like ornaments of speech.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बोले | बोले | spoke |
| बचन | वचन | words |
| बिगत | से रहित | free from |
| सब | सभी | all |
| दूषन | दोष | faults |
| मृदु | कोमल | gentle |
| मंजुल | सुंदर | beautiful |
| जनु | मानो | as though |
| बाग | वाणी के | of speech |
| बिभूषन | आभूषण | ornaments |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 378
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 378
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