अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जनु कठोरपनु धरें सरीरू। सिखइ धनुषबिद्या बर बीरू।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[इस सारे साज-सामानके साथ] मानो स्वयं कठोरपन श्रेष्ठ वीरका शरीर धारण करके धनुषविद्या सीख रहा है। श्रीरघुनाथजीको सब हाल सुनाकर वह ऐसे बैठी है, मानो निष्ठुरता ही शरीर धारण किये हुए हो॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 378 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जनु कठोरपनु धरें सरीरू। सिखइ धनुषबिद्या बर बीरू।।
सब प्रसंगु रघुपतिहि सुनाई। बैठि मनहुँ तनु धरि निठुराई।।
स्रोत अभिलेख 2.41 · पुस्तक पृ. 377, 378
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जनु कठोरपनु धरें सरीरू। सिखइ धनुषबिद्या बर बीरू।।
English explanation
It is as though hardness has taken bodily form as a mighty warrior learning archery.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जनु | मानो | as though |
| कठोरपनु | कठोरता | hardness |
| धरें | धारण करके | having assumed |
| सरीरू | शरीर | a body |
| सिखइ | सीखती है | learns |
| धनुषबिद्या | धनुष चलाने की विद्या | the art of archery |
| बर | श्रेष्ठ | mighty |
| बीरू | वीर योद्धा | warrior |
2 सब प्रसंगु रघुपतिहि सुनाई। बैठि मनहुँ तनु धरि निठुराई।।
English explanation
Kaikeyi told Rama the entire matter and sat as though cruelty itself had taken bodily form.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सारा | the entire |
| प्रसंगु | वृत्तांत | account |
| रघुपतिहि | रघुवंश के स्वामी राम को | to Rama, lord of the Raghu lineage |
| सुनाई | सुनाया | recounted |
| बैठि | बैठीं | sat |
| मनहुँ | मानो | as though |
| तनु | शरीर | a body |
| धरि | धारण करके | having assumed |
| निठुराई | निष्ठुरता | cruelty |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 378
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 378
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।