अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निधरक बैठि कहइ कटु बानी। सुनत कठिनता अति अकुलानी।।
मूल पाठ
निधरक बैठि कहइ कटु बानी। सुनत कठिनता अति अकुलानी।।
जीभ कमान बचन सर नाना। मनहुँ महिप मृदु लच्छ समाना।।
स्रोत अभिलेख 2.41 · पुस्तक पृ. 377, 378
भावार्थ
मूल पाठ के बादकैकेयी बेधड़क बैठी ऐसी कड़वी वाणी कह रही है जिसे सुनकर स्वयं कठोरता भी अत्यन्त व्याकुल हो उठी। जीभ धनुष है, वचन बहुत-से तीर हैं और मानो राजा ही कोमल निशानेके समान हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 377 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निधरक बैठि कहइ कटु बानी। सुनत कठिनता अति अकुलानी।।
English explanation
AI draft: Kaikeyi sits fearlessly and speaks bitter words; hearing them, even hardness itself becomes deeply distressed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निधरक | निडर होकर | fearlessly |
| बैठि | बैठकर | sitting |
| कहइ | कहती हैं | speaks |
| कटु | कड़वी | bitter |
| बानी | वाणी | speech |
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| कठिनता | कठोरता स्वयं | hardness itself |
| अति | बहुत | extremely |
| अकुलानी | व्याकुल हो गई | became distressed |
2 जीभ कमान बचन सर नाना। मनहुँ महिप मृदु लच्छ समाना।।
English explanation
Her tongue is a bow and her various words are arrows; the king is like a tender target.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जीभ | जीभ | tongue |
| कमान | धनुष | bow |
| बचन | वचन | words |
| सर | बाण | arrows |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| मनहुँ | मानो | as though |
| महिप | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| मृदु | कोमल | tender |
| लच्छ | निशाना | target |
| समाना | के समान | like |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 377
- सहायक विषय
- श्रीराम-कैकेयी-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 377, 378
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।