अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सिख अभिमत आसिष पाई। रही सीय दुहु प्रीति समाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दउनकी शिक्षा सुनकर और मनचाहा आशीर्वाद पाकर सीताजी सासुओं तथा माता-पिता दोनों ओरकी प्रीतिमें समायी (बहुत देरतक निमग्र) रहीं! [तब] श्रीरघुनाथजीने सुन्दर पालकियाँ मँगवायीं और सब माताओंको आश्वासन देकर उनपर चढ़ाया॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 611 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि सिख अभिमत आसिष पाई। रही सीय दुहु प्रीति समाई।।
रघुपति पटु पालकीं मगाईं। करि प्रबोधु सब मातु चढ़ाई।।
स्रोत अभिलेख 2.32 · पुस्तक पृ. 611, 612
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सिख अभिमत आसिष पाई। रही सीय दुहु प्रीति समाई।।
English explanation
After hearing their counsel and receiving the blessings she desired, Sita remained immersed in the love of both families.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सिख | सीख, उपदेश | counsel |
| अभिमत | मनचाहा | desired |
| आसिष | आशीर्वाद | blessings |
| पाई | पाकर | having received |
| रही | रहीं | remained |
| सीय | सीता | Sita |
| दुहु | दोनों पक्षों के | of both sides |
| प्रीति | प्रेम में | in love |
| समाई | डूबी हुई | immersed |
2 रघुपति पटु पालकीं मगाईं। करि प्रबोधु सब मातु चढ़ाई।।
English explanation
Rama called for fine palanquins and, after consoling all the mothers, helped them into them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| पटु | सुंदर, बढ़िया | fine, beautiful |
| पालकीं | पालकियाँ | palanquins |
| मगाईं | मँगवाईं | called for |
| करि | करके | having given |
| प्रबोधु | समझाइश, सांत्वना | reassurance, consolation |
| सब | सभी | all |
| मातु | माताओं को | the mothers |
| चढ़ाई | पालकियों में चढ़ाया | helped into the palanquins |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 611
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 611, 612
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।