अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
बार बार हिलि मिलि दुहु भाई। सम सनेहँ जननी पहुँचाई।।
मूल पाठ
बार बार हिलि मिलि दुहु भाई। सम सनेहँ जननी पहुँचाई।।
साजि बाजि गज बाहन नाना। भरत भूप दल कीन्ह पयाना।।
स्रोत अभिलेख 2.32 · पुस्तक पृ. 611, 612
भावार्थ
मूल पाठ के बाददोनों भाइयोंने माताओंसे समान प्रेमसे बार-बार मिल-जुलकर उनको पहुँचाया। भरतजी और राजा जनकजीके दलोंने घोड़े, हाथी और अनेकों तरहकी सवारियाँ सजाकर प्रस्थान किया॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 611 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 बार बार हिलि मिलि दुहु भाई। सम सनेहँ जननी पहुँचाई।।
English explanation
The two brothers repeatedly met the mothers affectionately and escorted them on their departure with equal love for all.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बार | बार | time |
| बार | बार | after time |
| हिलि | स्नेहपूर्वक घुलकर | with affectionate closeness |
| मिलि | मिलकर | having met |
| दुहु | दोनों | both |
| भाई | भाइयों ने | brothers |
| सम | समान | equal |
| सनेहँ | स्नेह से | with affection |
| जननी | माताओं को | the mothers |
| पहुँचाई | विदा करने के लिए पहुँचाया | escorted on their departure |
2 साजि बाजि गज बाहन नाना। भरत भूप दल कीन्ह पयाना।।
English explanation
After preparing horses, elephants, and various conveyances, the parties of Bharata and King Janaka set out.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| साजि | तैयार करके | having prepared |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| बाहन | वाहन | conveyances |
| नाना | अनेक प्रकार के | of various kinds |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| भूप | राजा जनक | King Janaka |
| दल | दल, साथ के लोग | parties, retinues |
| कीन्ह | किया | made |
| पयाना | प्रस्थान | a departure |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 611
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 611, 612
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।