अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता।।
मूल पाठ
हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता।।
बसह बाजि गज पसु हियँ हारें। चले जाहिं परबस मन मारें।।
स्रोत अभिलेख 2.32 · पुस्तक पृ. 611, 612
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी एवं लक्ष्मणजीसहित श्रीरामचन्द्रजीको हृदयमें रखकर सब लोग बेसुध हुए चले जा रहे हैं। बैल, घोड़े, हाथी आदि पशु हृदयमें हारे (शिथिल) हुए परवश मनमारे चले जा रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 612 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 हृदयँ रामु सिय लखन समेता। चले जाहिं सब लोग अचेता।।
English explanation
Holding Rama together with Sita and Lakshmana in their hearts, all the people proceed, lost to ordinary awareness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हृदयँ | हृदय में | in the heart |
| रामु | राम को | Rama |
| सिय | सीता | Sita |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana |
| समेता | सहित | together with |
| चले | चलते | moving |
| जाहिं | जा रहे हैं | are going onward |
| सब | सभी | all |
| लोग | लोग | people |
| अचेता | सुध-बुध खोए हुए | oblivious to their surroundings |
2 बसह बाजि गज पसु हियँ हारें। चले जाहिं परबस मन मारें।।
English explanation
Bulls, horses, elephants, and other animals too go onward, dispirited at heart, under others’ control, suppressing their own wishes.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बसह | बैल | bulls |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| पसु | पशु | animals |
| हियँ | हृदय से | at heart |
| हारें | हारे हुए, निरुत्साह | defeated, dispirited |
| चले | चलते | moving |
| जाहिं | जा रहे हैं | are going onward |
| परबस | दूसरों के वश में | under others’ control |
| मन | मन की इच्छा | their own wishes |
| मारें | दबाए हुए | having suppressed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.32
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 612
- सहायक विषय
- भरतजीका अयोध्या लौटना, भरतजीद्वारा पादुकाकी स्थापना, नन्दिग्राममें निवास और श्रीभरतजीके चरित्र-श्रवणकी महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 611, 612
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।