अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।।
मूल पाठ
सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।।
एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन। रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन।।
स्रोत अभिलेख 2.274 · पुस्तक पृ. 572, 572
भावार्थ
मूल पाठ के बादअयोध्यावासियोंकी प्रेममयी वाणी सुनकर ज्ञानी मुनि भी अपने योग और वैराग्यकी निन्दा करते हैं। अवधवासी इस प्रकार नित्यकर्म करके श्रीरामजीको पुलकितशरीर हो प्रणाम करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 572 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि सनेहमय पुरजन बानी। निंदहिं जोग बिरति मुनि ग्यानी।।
English explanation
Hearing the townspeople’s loving words, even wise sages disparage yoga and dispassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सनेहमय | स्नेह से भरी | filled with affection |
| पुरजन | नगरवासियों की | of the townspeople |
| बानी | वाणी | words |
| निंदहिं | निंदा करते हैं | disparage |
| जोग | योग-साधना की | yogic practice |
| बिरति | वैराग्य की | dispassion |
| मुनि | मुनि | sages |
| ग्यानी | ज्ञानी | wise |
2 एहि बिधि नित्यकरम करि पुरजन। रामहि करहिं प्रनाम पुलकि तन।।
English explanation
Having performed their daily observances in this way, the townspeople bow to Rama, their bodies thrilled with emotion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| बिधि | प्रकार | way |
| नित्यकरम | दैनिक धार्मिक कृत्य | daily religious observances |
| करि | करके | having performed |
| पुरजन | नगरवासी | townspeople |
| रामहि | राम को | to Rama |
| करहिं | करते हैं | offer |
| प्रनाम | प्रणाम | respectful salutations |
| पुलकि | रोमांचित होकर | thrilling with emotion |
| तन | शरीर | bodies |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 572
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 572
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।