अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।।
मूल पाठ
ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।।
सावधान सबही सनमानहिं। सकल सराहत कृपानिधानहिं।।
स्रोत अभिलेख 2.274 · पुस्तक पृ. 572, 572
भावार्थ
मूल पाठ के बादऊँच, नीच और मध्यम सभी श्रेणियोंके स्त्री-पुरुष अपने-अपने भावके अनुसार श्रीरामजीका दर्शन प्राप्त करते हैं। श्रीरामचन्द्रजी सावधानीके साथ सबका सम्मान करते हैं और सभी कृपानिधान श्रीरामचन्द्रजीकी सराहना करते हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 572 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 ऊँच नीच मध्यम नर नारी। लहहिं दरसु निज निज अनुहारी।।
English explanation
Men and women of high, low, and middle standing receive Rama’s audience in a manner suited to each.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ऊँच | ऊँचे स्तर के | of high standing |
| नीच | निम्न स्तर के | of low standing |
| मध्यम | मध्यम स्तर के | of middle standing |
| नर | पुरुष | men |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| लहहिं | पाते हैं | receive |
| दरसु | राम का दर्शन | an audience with Rama |
| निज | अपने | their own |
| निज | अपने | each one's own |
| अनुहारी | अनुरूप | in a fitting manner |
2 सावधान सबही सनमानहिं। सकल सराहत कृपानिधानहिं।।
English explanation
Rama attentively honors everyone; all praise Rama, the treasure of compassion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सावधान | ध्यानपूर्वक | attentively |
| सबही | सभी का | everyone |
| सनमानहिं | सम्मान करते हैं | honors |
| सकल | सभी | all |
| सराहत | सराहते हैं | praise |
| कृपानिधानहिं | कृपा के भंडार राम को | Rama, the treasure of compassion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 572
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 572
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।