अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दश्रीरामजीकी लड़कपनसे ही यह बान है कि वे प्रेमको पहचानकर नीतिका पालन करते हैं। श्रीरघुनाथजी शील और संकोचके समुद्र हैं। वे सुन्दर मुखके [या सबके अनुकूल रहनेवाले], सुन्दर नेत्रवाले [या सबको कृपा और प्रेमकी दृष्टिसे देखनेवाले] और सरलस्वभाव हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 572 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।।
सील सकोच सिंधु रघुराऊ। सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 2.274 · पुस्तक पृ. 572, 572
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 लरिकाइहि ते रघुबर बानी। पालत नीति प्रीति पहिचानी।।
English explanation
Since childhood, Rama, the foremost of Raghu’s line, has made it his practice to uphold right conduct and recognize and honor others’ affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| लरिकाइहि | बचपन ही | childhood itself |
| ते | से | since |
| रघुबर | रघुवंश में श्रेष्ठ राम की | of Rama, foremost of Raghu’s line |
| बानी | स्वभावगत रीति | habitual practice |
| पालत | निभाते हैं | upholds and maintains |
| नीति | उचित आचरण | right conduct |
| प्रीति | स्नेह | affection |
| पहिचानी | पहचानकर | having recognized |
2 सील सकोच सिंधु रघुराऊ। सुमुख सुलोचन सरल सुभाऊ।।
English explanation
Rama, king of Raghu’s line, is an ocean of noble conduct and modest reserve, with a beautiful face, lovely eyes, and a straightforward nature.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सील | सदाचार | noble conduct |
| सकोच | विनम्र संकोच | modest reserve |
| सिंधु | समुद्र | an ocean |
| रघुराऊ | रघुवंश के राजा राम | Rama, king of Raghu’s line |
| सुमुख | सुंदर मुख वाले | beautiful-faced |
| सुलोचन | सुंदर नेत्रों वाले | with lovely eyes |
| सरल | सरल | straightforward |
| सुभाऊ | स्वभाव | nature |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 572
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 572
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।