अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।।
मूल पाठ
कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।।
हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे।।
स्रोत अभिलेख 2.274 · पुस्तक पृ. 572, 572
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके गुणसमूहोंको कहते-कहते सब लोग प्रेममें भर गये और अपने भाग्यकी सराहना करने लगे कि जगत्में हमारे समान पुण्यकी बड़ी पूँजीवाले थोड़े ही हैं; जिन्हें श्रीरामजी अपना करके जानते हैं (ये मेरे हैं ऐसा जानते हैं)॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 572 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कहत राम गुन गन अनुरागे। सब निज भाग सराहन लागे।।
English explanation
Filled with love as they recounted Rama’s many virtues, everyone began praising their own good fortune.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहत | कहते हुए | while recounting |
| राम | राम के | Rama’s |
| गुन | गुण | virtues |
| गन | समूह | multitude |
| अनुरागे | प्रेम में अनुरक्त | filled with love |
| सब | सभी | everyone |
| निज | अपने | their own |
| भाग | भाग्य | good fortune |
| सराहन | सराहने | to praise |
| लागे | लगे | began |
2 हम सम पुन्य पुंज जग थोरे। जिन्हहि रामु जानत करि मोरे।।
English explanation
Few in the world possess such abundant merit as we do, whom Rama regards as his own.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हम | हमारे | us |
| सम | समान | like |
| पुन्य | पुण्य | spiritual merit |
| पुंज | भंडार | a store |
| जग | संसार में | in the world |
| थोरे | थोड़े हैं | are few |
| जिन्हहि | जिन्हें | whom |
| रामु | राम | Rama |
| जानत | मानते हैं | regards |
| करि | के रूप में | as |
| मोरे | मेरे अर्थात अपने | mine—that is, his own |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.274
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 572
- सहायक विषय
- जनकजीका पहुँचना, कोल-किरातादिकी भेंट, सबका परस्पर मिलाप
- मुद्रित पृष्ठ
- 572, 572
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।