अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि मुनि बचन सभासद हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दभरद्वाज मुनिके वचन सुनकर सभासद् हॢषत हो गये। 'साधु-साधु कहकर सराहना करते हुए देवताओंने फूल बरसाये। आकाशमें और प्रयागराजमें 'धन्य, धन्य की ध्वनि सुन-सुनकर भरतजी प्रेममें मग्र हो रहे हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 518 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सुनि मुनि बचन सभासद हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
धन्य धन्य धुनि गगन पयागा। सुनि सुनि भरतु मगन अनुरागा।।
स्रोत अभिलेख 2.21 · पुस्तक पृ. 517, 518
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि मुनि बचन सभासद हरषे। साधु सराहि सुमन सुर बरषे।।
English explanation
Hearing the sage’s words, those assembled rejoiced. The gods applauded with cries of ‘Well said!’ and showered flowers.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मुनि | मुनि के | the sage’s |
| बचन | वचन | words |
| सभासद | सभा के सदस्य | those assembled |
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| साधु | वाह! उत्तम! | well said! excellent! |
| सराहि | सराहकर | in praise |
| सुमन | फूल | flowers |
| सुर | देवताओं ने | the gods |
| बरषे | बरसाए | showered |
2 धन्य धन्य धुनि गगन पयागा। सुनि सुनि भरतु मगन अनुरागा।।
English explanation
Cries of ‘Blessed! Blessed!’ resounded in the sky and in Prayaga. Hearing them repeatedly, Bharata became absorbed in love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य! | blessed! |
| धन्य | धन्य! | blessed! |
| धुनि | ध्वनि; पुकार | sound; cries |
| गगन | आकाश में | in the sky |
| पयागा | प्रयाग में | in Prayaga |
| सुनि | सुनकर | hearing |
| सुनि | बार-बार सुनकर | hearing again and again |
| भरतु | भरत | Bharata |
| मगन | मग्न हो गए | became absorbed |
| अनुरागा | प्रेम में | in love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 518
- सहायक विषय
- भरतजीका प्रयाग जाना और भरत-भरद्वाज-संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 517, 518
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।