अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।।
मूल पाठ
सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।।
भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें।।
स्रोत अभिलेख 2.192 · पुस्तक पृ. 502, 503
भावार्थ
मूल पाठ के बादयह सुनकर निषादराज गुहने कहा—बूढ़ा ठीक कह रहा है। जल्दीमें (बिना विचारे) कोई काम करके मूर्ख लोग पछताते हैं। भरतजीका शील-स्वभाव बिना समझे और बिना जाने युद्ध करनेमें हितकी बहुत बड़ी हानि है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 502 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 सुनि गुह कहइ नीक कह बूढ़ा। सहसा करि पछिताहिं बिमूढ़ा।।
English explanation
Hearing this, Guha says, “The elder speaks rightly. Fools act rashly and then regret it.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| गुह | निषादराज गुह | Guha, the Nishada chief |
| कहइ | कहते हैं | says |
| नीक | ठीक | rightly |
| कह | कहता है | speaks |
| बूढ़ा | बूढ़ा | the elder |
| सहसा | बिना सोचे, जल्दबाजी में | rashly, without reflection |
| करि | करके | having acted |
| पछिताहिं | पछताते हैं | regret it |
| बिमूढ़ा | मूर्ख लोग | fools |
2 भरत सुभाउ सीलु बिनु बूझें। बड़ि हित हानि जानि बिनु जूझें।।
English explanation
Fighting without understanding Bharata’s nature and character, and without knowing the facts, would greatly harm our own interests.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भरत | भरत का | Bharata’s |
| सुभाउ | स्वभाव | nature |
| सीलु | शील, सदाचरण | character and conduct |
| बिनु | बिना | without |
| बूझें | समझे | understanding |
| बड़ि | बड़ी | great |
| हित | अपने हित की | to our interests |
| हानि | हानि | harm |
| जानि | जाने | knowing the facts |
| बिनु | बिना | without |
| जूझें | लड़ने पर | if we fight |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.192
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 502
- सहायक विषय
- निषादकी शङ्का और सावधानी
- मुद्रित पृष्ठ
- 502, 503
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।