अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।।
मूल पाठ
सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।।
तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी।।
स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 476, 477
भावार्थ
मूल पाठ के बादभरत यह सुनते ही विषादके मारे विवश (बेहाल) हो गये। मानो सिंहकी गर्जना सुनकर हाथी सहम गया हो। वे 'तात! तात! हा तात! पुकारते हुए अत्यन्त व्याकुल होकर जमीनपर गिर पड़े॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 476 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुनत भरतु भए बिबस बिषादा। जनु सहमेउ करि केहरि नादा।।
English explanation
Hearing this, Bharata became overwhelmed with grief, like an elephant frightened by a lion’s roar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनत | सुनते ही | on hearing |
| भरतु | भरत, दशरथ के पुत्र | Bharata, Dasharatha’s son |
| भए | हो गए | became |
| बिबस | विवश | overwhelmed; helpless |
| बिषादा | शोक से | with grief |
| जनु | मानो | as though |
| सहमेउ | सहम गया | was frightened |
| करि | हाथी | an elephant |
| केहरि | सिंह की | a lion’s |
| नादा | गर्जना से | by the roar |
2 तात तात हा तात पुकारी। परे भूमितल ब्याकुल भारी।।
English explanation
Crying, ‘Father! Father! Alas, Father!’ Bharata fell to the ground in utter distress.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | पिताजी! | Father! |
| तात | पिताजी! | Father! |
| हा | हाय! | alas! |
| तात | पिताजी! | Father! |
| पुकारी | पुकारकर | crying out |
| परे | गिर पड़े | fell |
| भूमितल | भूमि पर | to the ground |
| ब्याकुल | व्याकुल | distressed |
| भारी | अत्यंत | extremely |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 476
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 476, 477
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।