अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।।
मूल पाठ
तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।।
कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ। भूपति सुरपति पुर पगु धारेउ।।
स्रोत अभिलेख 2.16 · पुस्तक पृ. 476, 477
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! मैंने सारी बात बना ली थी। बेचारी मन्थरा सहायक हुई। पर विधाताने बीचमें जरा- सा काम बिगाड़ दिया। वह यह कि राजा देवलोकको पधार गये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 476 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तात बात मैं सकल सँवारी। भै मंथरा सहाय बिचारी।।
English explanation
AI-generated draft: My son, I had arranged everything; poor Manthara had helped.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तात | बेटा | my son |
| बात | बात; व्यवस्था | the matter; arrangements |
| मैं | मैंने | I |
| सकल | सारी | all |
| सँवारी | सँवार ली थी | had arranged |
| भै | बनी थी | became; had been |
| मंथरा | मंथरा, कैकेयी की दासी | Manthara, Kaikeyi’s maid |
| सहाय | सहायक | a helper |
| बिचारी | बेचारी | poor woman |
2 कछुक काज बिधि बीच बिगारेउ। भूपति सुरपति पुर पगु धारेउ।।
English explanation
Fate spoiled matters somewhat along the way: King Dasharatha departed for Indra’s city—that is, he died.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कछुक | कुछ; थोड़ा | somewhat |
| काज | काम; योजना | the undertaking; plan |
| बिधि | विधाता ने | Fate; the Creator |
| बीच | बीच में | along the way |
| बिगारेउ | बिगाड़ दिया | spoiled |
| भूपति | राजा दशरथ ने | King Dasharatha |
| सुरपति | देवताओं के राजा इंद्र की | of Indra, king of the gods |
| पुर | नगरी में | in the city |
| पगु | पाँव | foot |
| धारेउ | रखा; चले गए | set; departed |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.16
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 476
- सहायक विषय
- श्रीभरत-शत्रुघ्नका आगमन और शोक
- मुद्रित पृष्ठ
- 476, 477
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।