अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।।
मूल पाठ
सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।।
तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा।।
स्रोत अभिलेख 2.153 · पुस्तक पृ. 470, 471
भावार्थ
मूल पाठ के बादसारथी सुमन्त्रके वचन सुनते ही राजा पृथ्वीपर गिर पड़े, उनके हृदयमें भयानक जलन होने लगी। वे तड़पने लगे, उनका मन भीषण मोहसे व्याकुल हो गया। मानो मछलीको माँजा व्याप गया हो (पहली वर्षाका जल लग गया हो)॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 471 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सुत बचन सुनतहिं नरनाहू। परेउ धरनि उर दारुन दाहू।।
English explanation
Upon hearing his son’s words, King Dasharatha fell to the ground, his heart burning with terrible anguish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुत | पुत्र राम के | of his son Rama |
| बचन | वचन | words |
| सुनतहिं | सुनते ही | as soon as he heard |
| नरनाहू | राजा दशरथ | King Dasharatha |
| परेउ | गिर पड़े | fell |
| धरनि | धरती पर | to the ground |
| उर | हृदय में | in his heart |
| दारुन | भयंकर | terrible |
| दाहू | जलन या संताप | burning anguish |
2 तलफत बिषम मोह मन मापा। माजा मनहुँ मीन कहुँ ब्यापा।।
English explanation
He writhed as overpowering attachment engulfed his mind, like a fish enveloped in boiling water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तलफत | तड़पते हुए | writhing |
| बिषम | तीव्र और असह्य | intense and unbearable |
| मोह | मोह | attachment |
| मन | मन को | the mind |
| मापा | घेर लिया | engulfed |
| माजा | उबलता हुआ जल | boiling water |
| मनहुँ | मानो | as though |
| मीन | मछली | a fish |
| कहुँ | को | upon |
| ब्यापा | व्याप्त हो गया | spread over |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.153
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 471
- सहायक विषय
- दशरथ-सुमन्त्र-संवाद, दशरथ-मरण
- मुद्रित पृष्ठ
- 470, 471
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।