अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।।
मूल पाठ
सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।।
मुनि पट भूषन भाजन आनी। आगें धरि बोली मृदु बानी।।
स्रोत अभिलेख 2.79 · पुस्तक पृ. 408, 409
भावार्थ
मूल पाठ के बादसीताजी संकोचवश उत्तर नहीं देतीं। इन बातोंको सुनकर कैकेयी तमककर उठी। उसने मुनियोंके वस्त्र, आभूषण (माला, मेखला आदि)और बर्तन (कमण्डलु आदि) लाकर श्रीरामचन्द्रजीके आगे रख दिये और कोमल वाणीसे कहा—॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 408 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 सीय सकुच बस उतरु न देई। सो सुनि तमकि उठी कैकेई।।
English explanation
Sita gives no answer out of modest hesitation. Hearing this, Kaikeyi flared up.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| सकुच | संकोच | modest hesitation |
| बस | के वश में; के कारण | under the influence of; because of |
| उतरु | उत्तर | answer |
| न | नहीं | not |
| देई | देती हैं | gives |
| सो | वह बात | that |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| तमकि | क्रोध से तमतमाकर | flaring with anger |
| उठी | उठीं; हो गईं | became; rose up |
| कैकेई | कैकेयी, राम की सौतेली माता | Kaikeyi, Rama’s stepmother |
2 मुनि पट भूषन भाजन आनी। आगें धरि बोली मृदु बानी।।
English explanation
Bringing ascetics’ garments, ornaments, and vessels, Kaikeyi placed them before him and spoke gently.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मुनि | मुनियों के | of ascetics |
| पट | वस्त्र | garments |
| भूषन | आभूषण | ornaments |
| भाजन | पात्र; बर्तन | vessels; utensils |
| आनी | लाकर | having brought |
| आगें | सामने | in front |
| धरि | रखकर | having placed |
| बोली | बोलीं | spoke |
| मृदु | कोमल; मधुर | gentle; sweet |
| बानी | वाणी | speech |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.79
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 408
- सहायक विषय
- श्रीरामजी, लक्ष्मणजी, सीताजीका महाराज दशरथके पास विदा माँगने जाना, दशरथजीका सीताजीको समझाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 408, 409
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