अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दसीताजी, लक्ष्मणजी और सेवक गुहसहित श्रीरामचन्द्रजीने उन सुन्दर मूल-फलोंको बड़ी रुचिके साथ खाया। थकावट दूर होनेसे श्रीरामचन्द्रजी सुखी हो गये। तब भरद्वाजजीने उनसे कोमल वचन कहे—॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 432 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।।
भए बिगतश्रम रामु सुखारे। भरव्दाज मृदु बचन उचारे।।
स्रोत अभिलेख 2.107 · पुस्तक पृ. 432, 432
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 सीय लखन जन सहित सुहाए। अति रुचि राम मूल फल खाए।।
English explanation
Rama looked radiant with Sita, Lakshmana, and their companions, and ate roots and fruits with great relish.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीय | सीता | Sita, Rama’s wife |
| लखन | लक्ष्मण | Lakshmana, Rama’s brother |
| जन | साथ के जन | companions; attendants |
| सहित | के साथ | together with |
| सुहाए | शोभायमान | looking radiant |
| अति | बहुत | greatly |
| रुचि | रुचि से | with relish |
| राम | राम ने | Rama |
| मूल | खाने योग्य जड़ें | edible roots |
| फल | फल | fruits |
| खाए | खाए | ate |
2 भए बिगतश्रम रामु सुखारे। भरव्दाज मृदु बचन उचारे।।
English explanation
Rama’s fatigue departed, and he felt at ease. Bharadwaja spoke gentle words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भए | हो गए | became |
| बिगतश्रम | थकान से मुक्त | free of fatigue |
| रामु | राम | Rama |
| सुखारे | सुखी, आराम में | comfortable; at ease |
| भरव्दाज | मुनि भरद्वाज ने | the sage Bharadwaja |
| मृदु | कोमल | gentle |
| बचन | वचन | words |
| उचारे | कहे | uttered |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 432
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 432, 432
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।