अयोध्याकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कुसल प्रस्न करि आसन दीन्हे। पूजि प्रेम परिपूरन कीन्हे।।
मूल पाठ
कुसल प्रस्न करि आसन दीन्हे। पूजि प्रेम परिपूरन कीन्हे।।
कंद मूल फल अंकुर नीके। दिए आनि मुनि मनहुँ अमी के।।
स्रोत अभिलेख 2.107 · पुस्तक पृ. 432, 432
भावार्थ
मूल पाठ के बादकुशल पूछकर मुनिराजने उनको आसन दिये और प्रेमसहित पूजन करके उन्हें सन्तुष्ट कर दिया। फिर मानो अमृतके ही बने हों, ऐसे अच्छे-अच्छे कन्द, मूल, फल और अंकुर लाकर दिये॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 432 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कुसल प्रस्न करि आसन दीन्हे। पूजि प्रेम परिपूरन कीन्हे।।
English explanation
AI draft: The sage asked after their welfare, gave them seats, and welcomed them with abundant love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कुसल | कुशल-क्षेम | welfare |
| प्रस्न | पूछताछ | inquiry |
| करि | करके | having made |
| आसन | बैठने के स्थान | seats |
| दीन्हे | दिए | gave |
| पूजि | आदर-सत्कार करके | having honored them |
| प्रेम | प्रेम से | with love |
| परिपूरन | भरपूर | abundant; complete |
| कीन्हे | किया | made; performed |
2 कंद मूल फल अंकुर नीके। दिए आनि मुनि मनहुँ अमी के।।
English explanation
The sage brought and offered fine tubers, roots, fruits, and sprouts, as though made of nectar.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कंद | कंद | edible tubers |
| मूल | जड़ें | roots |
| फल | फल | fruits |
| अंकुर | कोमल अंकुर | tender sprouts |
| नीके | अच्छे, सुंदर | fine; pleasing |
| दिए | दिए | offered |
| आनि | लाकर | having brought |
| मुनि | मुनि भरद्वाज ने | the sage Bharadwaja |
| मनहुँ | मानो | as though |
| अमी | अमृत | nectar of immortality |
| के | के बने हुए | made of |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- अयोध्याकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 2.107
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 432
- सहायक विषय
- प्रयाग पहुँचना, श्रीराम-भरद्वाज-संवाद, यमुनातीरनिवासियोंका प्रेम
- मुद्रित पृष्ठ
- 432, 432
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।